मां गायत्री ।। 28 गायत्री

Updated: May 3, 2020



ब्रह्म गायत्री

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नःप्रचोदयात्‌ ॥१ ॥


राम गायत्री

ॐ दाशरथाय विद्यहे सीता वलल्‍लभाय धीमहि तन्‍नो राम: प्रचोदयात्‌ ॥२॥


जानको गायत्री

ॐ जनकनन्दिन्यै विद्यहे भूमि जाये धीमहि तन्‍नो सीता प्रचोदयात्‌ ॥३॥


हनुमान् गायत्री

ॐ अंजनी सुताय विद्नहे वायु पुत्राय धीमहि तन्‍नो हनुमान्‌ प्रचोदयात्‌ ॥४॥


लक्ष्मण गायत्री

ॐ दाशरथाय विद्यहे उर्मिला प्रियाय धीमहि तनन्‍नो लक्ष्मण: प्रचोदयात्‌ ॥५॥


कष्ण गायत्री

ॐ देवकी नन्दनाय विद्यहे वासुदेवाय धीमहि तन्‍नो कृष्ण: प्रचोदयात्‌ ॥६॥


राधा गायत्री

ॐ बृषभानुजायै विद्यहे कृष्ण प्रियायैधीमहि तननो राधा प्रचोदयात्‌ ॥७॥


नारायण गायत्री

ॐ नारायणाय विद्यहे वासुदेवाय धीमहि तनन्‍नो नारायण; प्रचोदयात्‌ ॥८ ॥


गोपाल गायत्री

ॐ गोपालाय विद्यहे गोपीजन बल्‍लभाय धीमहि तन्‍नो गोपाल: प्रचोदयात्‌ ॥९॥


हयग्रीब गायत्री

ॐ बागीश्वराय विद्यहे हयग्रीवाय धीमहि तननो हंस: प्रचोदयात्‌ ॥१०॥


विष्णु गायत्री

ॐ विष्णु देवाय विद्याहे वासुदेवाय धीमहिं तन्‍नो विष्णु: प्रचोदयात्‌ ॥११॥


लक्ष्मी गायत्री

ॐ महालक्ष्मी च विद्यहे विष्णु पत्ती च धीमहि तन्‍नो लक्ष्मी: प्रचोदयात्‌ ॥१२॥


नृसिंह गायत्री

ॐ उग्र नृसिंहाय विद्यहे वज़ नखाय धीमहि तन्‍नो नृसिंह: प्रचोदयात्‌ ॥१३॥


गरुड़ गायत्री

ॐ तत्‌ पुरुषाय विद्यहे स्वर्णपक्षायधीमहि तनन्‍नो गरुड़: प्रचोदयात्‌ ॥१४॥


तुलसी गायत्री

ॐ श्री तुलस्ये विद्यहे विष्णु प्रियाये धीमहि तन्‍नो वृन्दा प्रचोदयात्‌ ॥१५॥


सरस्वती गायत्री

ॐ सरस्वत्ये विद्यहे ब्रह्म पुत्रिये धीमहि तन्‍नो देवी प्रचोदयात्‌ ॥१६॥


रुद्र गायत्री

ॐ ततू पुरुषाय विद्यहे महादेवाय धीमहि तन्‍नो रुद्र : प्रचोदयात्‌ ॥१७॥


गौरी गायत्री

ॐ गिरिजाये विद्यहे शिव प्रियाये धीमहि तन्‍नो गौरी प्रचोदयात्‌ ॥१८॥


हंस गायत्री

ॐ परम हंसाय विद्यहे महाहंसाय धीमहि तन्‍नो हंस: प्रचोदयात्‌ ॥१९॥


सूर्य गायत्री

ॐ भाष्कराय विद्यहे दिवाकराय धीमहि तन्‍नो सूर्य: प्रचोदयात्‌ ॥२०॥


चन्द्र गायत्री

ॐ क्षीर पुत्राय विद्यहे अमृत तत्वाय धीमहि तन्‍नो चन्द्र :प्रचोदयात्‌ ॥२१॥


परशुराम गायत्री

ॐ यामदग्न्याय विद्यहे महावीराय धीमहि तनन्‍नो परसुराम: प्रचोदयात्‌ ॥२२॥


गुरु गायत्री

ॐ पर ब्रह्मणे विद्यहे गुरु देवाय धीम॑हि तनन्‍नो गुरु: प्रचोदयात्‌ ॥२३॥


अग्नि गायत्री

ॐ महा ज्वालाय विद्यहे अग्नि देवाय धीमहि तनन्‍नो5ग्नि: प्रचोदयात्‌ ॥२४॥


पृथ्वी गायत्री

ॐ पृथ्वी देव्ये विद्यदेसहस्रमूर्तये धीमहि तननो पृथ्वी प्रचोदयात्‌ ॥२५॥


जल गायत्री

ॐ जल विम्बाय विद्यहे नील पुरुषाय धीमहि तन्‍नो>म्बु: प्रचोदयात्‌ ॥२६॥


पवन गायत्री

ॐ पवन पुरुषाय विघ्नहे सहस्र मूर्त्ये धीमहि तनन्‍नो वायु: प्रचोदयात्‌ ॥२७॥


आकाश गायत्री

ॐ आकाशाय विद्यहे नभोदेवाय धीमहि तन्‍नो गगन प्रचोदयात्‌ ॥२८॥

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