मांगलिक गीत माला

हमारा समाज पूर्व वैदिक काल से ही वाचिक परम्परा का समाज रहा है। माथुरी संस्कृति की लोक मंगल भावना का विपुल साहित्य दीर्घकाल तक इस वाचिक परम्परा मे कण्ठों में ही संचित और सुरक्षित रहा। प्राचीन काल से ही इस लोक साहित्य की सर्वाधिक सुरक्षा हमारी महिलाओं ने की है क्योंकि उन्होंने इसे जीवन शैली क॑ एक अंग के रुप में स्वीकारा और आत्मसात किया, मनोयोग पूर्वक इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी अग्रसारित भी किया, हमारा कोई भी मांगलिक अनुष्ठान, कोई शुभ कार्य मौखिक परम्परा के इन गीतों के बिना पूरा नहीं होता। लोक-वार्ता-साहित्य की दृष्टि से भी इन गीतों का अपना महत्व है क्योंकि सामाजिक परम्परा के अनेक गृढ़-गुह्य गृह सत्र इनक मृल में विलुप्त प्राय: से सुसुप्त हैं। इसे वस्तु के रूप में नहीं उसके भीतर की व्यंजना कं रूप में देखें | इन लोक गीतों का उददेश्य अपने परिप्रे क्ष्य से हमें संलग्न रखना है। संस्कार एवं पर्व गीतों का लक्ष्य स्वयं को ऐसे व्यापक भाव से भरना है जिसे भरकर हम जीवन को अखण्डित दृष्टि से देखें-मानवीय रिश्तों को विश्वराग की भूमिका के रूप में स्वीकारें | यह सर्वे भवन्तु सुखिन: की अनुगूंज है।  महानगरों में जन्मी. पली -पढ़ी और बढ़ी हमारी अभिनव पीढ़ी की कलबंधुओं की मांगलिक अपेक्षा पूर्ति को दृष्टि से यह एक मनोरम उपहार है। इस गीत-मंच की संयोजक श्रीमती सुमन चतुर्वेदी एवं सहयोगिनी श्रीमती प्रमिला, डॉ. क्‌. लक्ष्मी चतुर्वेदी का स्नेह स्निग्ध अध्यवसाय है यह गीत माला जो भविष्य के अन्वेषकों हेतु उत्प्रेरक भो है। यह ब्रज क॑ लोक-जीवन की एक पार्श्व-छवि का प्रस्तुतीकरण भी है। लोक मानव की यह अति आत्मीय अभिव्यक्ति है। कवि के शब्दों में :-  व्रत- पर्वोत्सव, त्यौहारों के इन गीतों में , परम्परा में , प्रथा, चलन, रसमय रीतों में, खोज रुचिर क्षणों में याद शशी की । सजा रहे शब्दों में मंजुल मृदुल हँसी को ॥


श्री गणेश वन्दना :-

गणपति गौरी के लाल हो, गुन गाऊ तुम्हारे । पूरन करौ शुभ काज हो गुन गाऊँ तुम्हारे ॥ गजानन्द तुमको मैं केसे मनाऊँ। ये छोटा सा मस्तक गजानन तुम्हारा सवामन का मुकुट मैं कैसे धराऊँ ॥ ये छोटा सा अंग गजानन तुम्हारा, सवामन का चोला में कैसे चढ़ाऊँ॥ ये छोटी सी गर्दन गजानन तुम्हारी , सवामन का हरवा मैं कैसे पिराऊँ॥ ये छोटा सा मुखड़ा गजानन तुम्हारा, सवामन के लड्डू मैं कैसे धराऊँ ॥ गजानन............................

श्री वन्दना :-

हरे हरे बॉस की छबरिया हो दौना मरूआ के फूल | के तुम मालिन बेटिया हो, कै बनजारे की धीअ ? नां हम मालिन की बेटिया, नां बनजारे की धीअ | हम तौ बेटी जलफ दे | जिन सिरजौ संसार ॥ अहो एक संसार, अरत भड़ारू रहसे मारग जाँइ । जो तुम साँची जलफ दे, हो नींद हरन धन देउ मेरी माता | अँधरिन नैंना रोगिनकाया सब कष्टन हर लेड। हरउ दूख चन्द्राबलि रानी ! सुमरहु याद भवानी ॥ जो तुम साँची जलफ दे हो! मलिया है सपनों देउ। बामलिया सों यों कहौ, मेरी माता कौ बाग लगाऔ॥ भलौ करौ बाग लगाइयै हो। उपजै हैं दाड़िमदाख । अहो दारी दाख सदाँ फल लटकें , छुटक रहे हैं अनार ॥ आधे सूघे परमल लटकें , चोखे नागर पान । हरी हो करौंदा, दल तुलसा को, मेरी माता कौ बाग रमानों ॥ जो तुम साँची जलफ दे हो। ओड़ा है सपनों देउ। वा ओड़ा सों यों कहौ, मेरी माता कौ ताल खुदाउ॥ भलौ करौ ताल खुदाइयै हो ! धीअ गुरु पार बँधामें । पार बँधाइ सीअर मन माई जातीय ये सबन्हाँइ ॥ गऊएऐं छबासी पानी पीवें , कुँअर करें स्नान | चकई-चकवा केलि करत हैं, मेरी माता को ताल रमानों ॥ (देवी-माता की जात के समय का यह महत्वपूर्ण गीत वस्तुत: गृहस्थी की स्वास्थ्य एवं शशद्धि हेतु प्रतीकात्मक प्रकृति वंदना है) “माता की जय"

'दिन धराना व बैनी लिपाना' :-

चम्पो बोरे रहियो | को तेरे बीनेगे फूल को तेरे हार गुहैहो ? मलिया को बीनेगौ फूल मालिन वाकी हार गुहैहो | दुल्हा फूल बीने दुल्हन हार गुहैहो ॥ गुहे गुहाए हार सातो बहनों को पिराये। तार माता तार हम तेरे सन्त भगत हैं, सन्तन को कछु देव सीयर मेरी याद भवानी | झाझन की झंनकार सब जाति जात परे हो । नेहर की दुमकार सब जाति जाग पर हो । मांग जातिन मांग जो त्तेरे मन भावै । मांगोगी अरथ भंडार सबै परिवार भवानी | मोगोगी चरुआ दूध गोदी पूत भवानी । दूध पूत दोये वार सब नाती बेटा दीए निशानी ॥

छठी पूजा का गीत :-

छठी पुजंतर बहू आई सीता | छठी पुजंतर बहू आईं राधा ॥ वरदा आईं गौरा रुकमिनी । छटी पुजंतर कहा फलु माँगें। अनु माँगें, धनु माँगें-अपने पुरखन को गज माँगें ॥ बारो जरूलौ गोद माँगें ॥ एवं हँसी-खुसी कहै छठी, चिरजीवी होड़ होगिल ॥ (नवजातक की चिरायु सहित परिवार की समृद्धि हेतु यह मंगल गीत छठी पूजा के मापन अवसर पर घर की बयोवृद्ध महिला द्वाग गाया जाता है ।)

मातृका पूजन “(माँय पूजा)” :-

ए उजिरायल बूदों वारे समीर लालपाग पैरी नेक डाशै दे लाल गुलाल राय बुंदेला आस-पास मुगलन के डेरा तो दीपिका को डेरा न्यारौ (यहाँ घर के देवर जेठी सबके नाम लेकर गाया जाता है।)

”एक ताई” :-

एक ताई महमूदी की नारंगी सूतन लाल, मेरो कुल दीपक अजब बनों है भले बनना | केसरीया जामा बनों , याको पटका अजब बहार | मेरो कुल...................... सिर अठियोली पाग पै याके सोहे खिजूर कौ मौर मेरो कुल दीपक ..................

यज्ञोपवीत में बालक को तेल चढ़ाते समय का गीत :-

मांगर हे दारी (माँ का नाम) दे। मांगर हे दारी (दादी का नाम) दे। मांगर हे दारी (काकी का नाम) दे। इसी प्रकार भाभी, भूआ, सभी देवर जेठियों के नाम से गाते हैं।

साद फरेई का गीत :-

हो अलवेली के नाहर जब पहलो मास लाग्यौ, तब देहर बैठ गँवायौ । दूसरौ मास जब लाग्यौ, तब फूल छड़ी मन लाग्यौ । जब तीसरौ मास लाग्यौ, तब आम नीबून मन लाग्यौ। जब चौथौ मास लाग्यौ, तब खटरस पै मन लाग्यौ । जब पांचवों मास लाग्यौ, तब मीठेन पै मन लाग्यौ | जब छठी मास लाग्यौ, तब झूना पै मन लाग्यौ । जब सातवों मास लाग्यौ, तब सादन पै मन लाग्यौ । जब आठवौ मास लाग्यौ, तब घाटन पै मन लाग्यौ । जब नवो मास लाग्यौ, तब खाट पीढ़न मन लाग्यौ | दसवौ मास जब लाग्यौ, तब होलन लालन शब्द सुनायी | रस फुइयाँ परें रे आधीरात ठाड़े भीजे दोऊ जोवना । “ससुर का नाम” छवायौ रे खसको रे बंगला “सास का नाम” छवावे टूटी छात ककिया ससुर का नाम छवायौ रे खसको रे बंगला “ककिया सास का नाम देवर छवायौ रे खसको रे बंगला मेरे मोदू लाल तेरीधनि कैसी बनी | नित उठ देखों लाल तेरीधनि कैसी बनी ॥

यज्ञोपवीत (जनेऊ के गाने का गीत) :-

सतजुग वेद अथरवन बरूआ चारो वेद पुरान । तौ बाम्हन सामवेद पढ़ि चम्पिय लेउ नरायन ॥ कहाँ ते तुम आये हो वरूआ। कहाँ लियो बिसराम, मथुरा ते हम आयें हैं बरूआ गोकुल लियौ बिसराम, कौन के कुल तुम जनमेहो बरूआ , कौन के धर्म दुहेत । बाबा के कूल हम जनमे हो बरूआ, नाना के धर्म दुहेत ॥ बाबा घर हम जनमे हैं बरूआ, बाबुल के राजा पूत | बाबा कध जनेऊ दे हैं, दादी भिक्षा देह अकूत ॥ मानिक मोती और अँगूठी सो बरूआ को देउ ह गूजा-मढ़ढे मोंतीचूर के लडुआ सो बरूआ कों देउठ। गरजी भीख न लैहौं री मईया जो सोने की होइ, सवा हाथ धरती हम माँगें और महुआ को दंड । पियरी कछुटिया बरूआ कों सोहै बूढ़ी भिक्षा देय ॥ गंग जमुन बिच परिगयौ रेत, चंकिम खेत मचीकम माटी | तहँ लैके बईयेगो सुदृढ़ कपासू, कौनस गोड़ों कोनस वोयौ | कौन धुरंधर जुत्यौ है कपासू, अर्जुन बोयौ, भीमसैन जोत्यौ। गऊअ धुरंधर जुत्यौ है कपासू , सूरज किरनन तिरयौ है कपासू॥ सोने की रेहटिन उहयौ है कपासू , बाँसन ढुलियन बिनयौ है कपासू। लाल पलंग पर सुरभौ है कपासू, सोने की तकलिन कत्यौ है कपासू॥ राई रुकमनी कातन हारी, बामन बिटिया ने कातौ है सूत, चौबे के बेटा नें बट्यौ जनेऊ, एक गुन द्वै गुन तिगुन जनेऊ। चार गुन पाँच गुन छै गुन जनेऊ, छै गुन जनेऊ लै कें छत्रीय दीजै | सात गुन आठ गुन नौ गुन जनेऊ, नौगुन जनेऊ लैकें बरूआ ऐ दीजै ॥ पर बाबा के पंती पंडित करि लीजै, कंध जनेऊ लैकें माथुर (चौबे) कों चलियै॥ डंड-कमंडल लैके परिजन चलियै, मृग छाला त्तैकें रक्षक चलिये पीरी कझौटी लैंकैं बूढ़ी दादी चलियो, मैया-भैन-भूआ, जीजा फूफा चलियों । सर्ब सोने को सुंदर रथ गढ़ियै , अंग-अंग हीरा मोंती सो जढ़िये ॥ सोई रथ बैठकें पंडितजू चलियैं ,बामन बरूआ को दीनी है असीस ॥ तुम चिरजीऔ बेटा बरस सतीक ॥

भिक्षा :-

मेरी बाम्हन बरूआ हो दादी भीख दै । तो पै भीख पूजै न ऐ ! उलटि असीस दै ॥ मेरी कासी कौ बासी हो म थुरा जनमियौ, मेरी बाम्हन बरूआ हो ! पढ़न पयाछरौ ॥ ( इसी प्रकार अन्य सम्बन्धियों का नाम लेकर ' भीख दै ' गाया जाता है)

सेहरौ :-

ऊँची अटारी ईट की मेरी मालिन अरे मलिया दीयला जरै चहँँचाल (सारी रात) । मेरी मालिन सेहरौ गुहे लाल (नाम) बेलकौ ॥ जहाँ चढ़ मलिया को पौड़ियौ मेरी मालिन | अरे मालिन वाकी ढ़ारै व्यार री ॥ अरे मेरी मालिन सेहरौ गुहिला, अंगूठा मोर जगाईए मेरी मालिन | अरे मलिया कारे सुख सोवे नींदरी अरे मेरी मालिन सेहरी गुहिला बेल कौ । का है बीज उजाउती मेरी मालिन अरे मालिया को मारी है टेर | मेरी मालिन........... (लड़के के पिता का नाम) बीज उलाउती मेरी मालिन (लड़की के पिता का नाम) अरे (लड़के के नाम ) मारी टेर कंछ जनेऊ पाढ कौ । याकी सेल खड़ी तलवार।। मेरो कूल दीपक पहरैगौ सेहरी ॥ अतलस को सूतन बनी याकौ नारो अजब बहार | मेरो कुल दीपक.................- मखमल के मोजा बने । और जूता अजब बहार। मेरो कुल दीपक................. वृखवान नाइन बन आई, पाँव महावर देह । मेरो कुल दीपक............... नन्दन बन की बनसरी मेरी मालिन अरे मालिया सरवर पेड़, खूजर री मेरी मालिन सेहरौ री कैलख गुह गुहायौ सेहरौ री मेरी मालिन ॥ अरे माली धरयो छवरिया के बीच री मेरी मालिन । सेहरो गुहलाओ मालिन सेहरौ ॥ गुहै गुहायौ सेहरौ री मेरी मालिन। धरयो है हार री मेरी मालिन ॥ (सराफ के) अगल-बगल दीये आरसी मेरी मालिन, अरे मलिया बिच बिच हीरा मोती लाल री । मेरी मालिन.................. (पुरखों के नाम लेकर सेहरौ गाना है) अरे मालिन धरयो ये पुरखन की पौर री मेरी मालिन................. गुहे गुहायो सेहरी री धरयो बाबुल की पौर | गुहायो गुहायो हार (सभी रिश्तेदारों का नाम) गुहे गुहायो सेहरी री धरयो सागर के सीस री मालिन..................... के लख सेहरें कौ मौल री मालिन ! केलख बाबुल सेहरौ ? नो लख सेहरे कौ मोल री मेरी मालिन अरे मलिया दसलाख बाबुल देय री मेरी मालिन सेहरी.................... तुम्हारे सागर लाल सेहरे की कोऊ सात जनी रखवार री मेरी मालिन सेहरी.................. नानी, मौसी, फूफरी मेरी मालिन अरे मलिया सगी है बहन रखवार सेहरौ, री मेरी मालिन सेहरौ ॥

“घोड़ी” :-

मेरे यारौ घोड़ी तो एक न एकती और धुर पर्वत सों आई | हो तुरियन सांधौ जाइ री बनरी कौ बाधौ ना रहे ॥ चार खुरा याके बाजने याके महदुल राचे केश | हो तुरियन साधो बनरी को बाधो नां रहै ॥ मेरे यारो हरी जरी की झिलमिली, या को मुतियन जड़ी है लगाम । हो तुरियन साधौ, बनरी को बाँधो नारहै। मेरे यारी केसरिया जामा बनौ या कौ पटका लाल गुलाल, हो तुरियन साधौ जायरी । बनरी को बाधो नांरहै॥ मेरे यारी सिर अठियोली पाग पै, याको सोह खजूर को मौर री । तुरियन साधो जायरी बनरी को बाधो नांरहे॥ लाओ री सुरमा लग्यौ याकी चितवन मन हर लेइ री वनरी को बाधो नारहे...... ॥ हो तुरियन साधौ जायरी ॥ अतलस की सूतन बनी, याकौ नारौ अजब बहार । हो तुरियन साधी जायरी ॥ मखमल के मोना बने याके जूता अजब बहार ॥ हो तुरियन........ मेरे यारौ ये गलियारौ सांकरी याके संग महाजन लोग हो तुरियन......... माय बुलाओ आपनी घोड़ी तो पूजे आय ॥ हो तुरियन......... मेरे यारौ गंगाजल मुख धोईये, और पियरी चना की दाल | हो तुरियन साधौ जाय री, बनरी को बाधौ नांरहे ॥ मेरे यारी बहन बुलाऔ आपनी और झनक उतारे राई नोंनरी बनरी.............. राई तो महगी आई है, और नॉन संबर के देश । हो तुरियन.............. मेरे यारौ आस फंसी मन डहडयौ दादी नानी के हियरा में भयौ है सिहात पूतलै घर आइये ।

“राम का सेहरा” :-

मेरे श्रीराम का सेहरा तू बना ला मालिन | मेरे श्रीराम जनकपुर में धनुष तोड़ेंगे। उसी की खुशी में सेहरा तू बना ला मालिन | नेकी के फल तू चुन-चुन के लगाला मालिन | ज्ञानगुण धर्म के फूलों से सजाला मालिन॥ गोरे मुखड़े पै लड़ी अरी झूम के आई कैसी । जिस तरह झूलता सावन का हिंडोला मालिन । मेरे श्रीराम............ सेहरा अनमोल बना क्या नेंग दिला दूं तुझको तू ही बाबुल से जाके नेग चुका ला मालिन॥ मेरे श्रीराम..........

डाले का गीत :-

रिमझिम रिमझिम-रिमझिम बरसेगौ मेघ री बरसत आगवे मेरो भात री । वीरा मेरे हथियन पे सवार, मैंने जानी काका, बाबा आइये वीरा मेरे लहटू खेलन हार । मैंने जानी भइया भतीजे आईये वीरा मेरे अधविच तम्‌ ये खाय वीरा मेरे आइ बैठियो |

बन्नी गीत :-

माढ़े के बीच लाढ़ो ने केश सुखाये लाढ़ो बाबा चतुर बर ढूड़ौ, चतुर बर ढूड़ौ ॥ दादी लैंगी कन्यादान। लाढ़ो नें केश सुखाये | बाबुल चतुर बर ढूडी-चतुर वर ढूड़ी ॥ मइया लैइगी कन्यादान, लाढ़ो नें केश सुखाये |

पुत्र विवाह :-

चलते लोग पकरियो रे बनना भाजौई जाइ। बाबा की ले गयौ ढ़ाल तरबरिया, " दादी की लै गयौ चुँदरिया रे ! बनना भाजौई जाइ ॥ । (क्रमश: माता पिता एवं अन्य निकटस्थों के नाम) तदन्तर - | खूँटी पै टाँग दीनी ढ़ाल तरबरिया, महफिल में धर दीनी चूंदरिया रे । | बनना भाजौई जाइ॥ (यह गीत 'वर ' के भाँवरो के लिए निकलते समय गाया जाता है। यह कटष्टि एवं भद्रा निवारण हेतु प्रचलित है। )

आरतौ :-

झरि झमकेन बरसैगौ मेहुरी झमकारेन माँगर बाजैगौ, तुम बैठी लाढ़ले चौक पै तुम्हारी भैना करैगी आरतौ | अथेयाँ के पूछेंगे लोग री भेना कहा-कहा लाई आरतौ | में लाई हौ नेग हजार गोदभर लाई बाइनों ।

ललमनियाँ :-

(यह कन्या विवाह में बरात के बख्त छत पर चढ़ी कन्या पक्ष की महिलाओं द्वारा गाया जाता है। 'आवत जाउ-जेंमत जाउ' प्रथा के चलते अब यह परम्परा लुप्त प्राय: है। ) मेरी जल्दी खबर सुधि लीजो रजना ! कारी परिंगई रजना-पीरी परिगई रजना । मेरी0 बैद बुलइयो रजना-नबज दिखइयो रजना ॥ मेरी0 कोठे ऊपर कोठरी रजना ठाड़ी सुखाइ रही केश, पारु दिखाई दे गयौ कोई धरि जोगी कौ भेस ॥ कारी परिंगई रजना पीरी परि0 आगरे की गैल में परी चना की रासि, गठरी लुगैया ले गईं लोग कहैँ स्यावास ॥ मेरी0 आगरे की गैल में परयो भुजंगी स्याँप, | लोटै-पीटे फनु करै सरकि बिले में जाइ ॥ पीरी परिगई रजना ॥ आगरे की गैल में सतुआ सौठ बिकाइ चतुर-चतुर सौदा करें मूरख धक्का खाइ ॥ मेरी0 दिल्लीी शहर बजार में उलटी टेंगी कमान, खेंचन हारौ घर नहीं देवरिया नाँदान ॥ मेरी0 हरौ नगीना नग जड़यौ उँगरी में दुख देइ, ऐसे के पालें परी जो हँसे न ऊतर देइ ॥ पीरी0 हरयौ नगीना आरसी उँगरी में सुख देइ, रसिया के पालैं परी हँस-हँस ऊतर देइ ॥ पीरी परिगई रजना मेरी राजा जनक के आई है बरात, बराती आए हरे हरे0 राजा, जिमाओऔ इनकों हरे-हरे। राजा जनक के आई है बरात । सखीरी इनकों पातर देउ मँगाइ-सखीरी, इनको दौंना देठ मँगाइ-परीसौ इनकों हरे : हरे-राजा जनक के आई है बारात ॥ भला राजन ! भला राजन ! सिगरे बराती अटपटे, भोजन भवन में आजुदे | ऐ पूरी लो-कचौरी लो, ऐ खुरमा लो इमरती लो ( भला राजन) सिगरे बराती हींजरे, बैठे हैंएक पींजरे। ऐ मिलनी लो, पिरामन लो भला राजन | ऐ भैंन चुनी। हाँ भैन मुनी, ऐ बंराती जूठन गोझा में लै चले काऊ नें सुनी हाँ भेन सुनी –

मेंहदी गीत :-

( कन्या विवाह में मेंहदी लगाते समय महागौरी वंदना) मेरी गौरा जी की स्दाँ जै होइ, गौरा जी की मेंहदी राचनी । मेरी सीया जू की सदाँ जे होइ, सीया जू की मेंहदी राचनी ॥ राधारानी को सदाँ जे होइ किशोरी जू की मेंहदी राचनी ॥ अलि नेनन धालौ मेष , सुख देनी को काजर लागनो ॥ राचे-राचे सासू जी के हाथ, बहू बेटिन के हाथ अहबातिनिकी मेंहदी राचनी ॥

सीया-दोहा :-

(चौक पर बैठते समय का गीत) सीया दोआ राजो तोरन स्वम्भा आँगन-चाँदन चौरसिओ आसन मोर सिंहासन देउ। बाँह मोरियो कूम कलिस सों चौबे अमुक चंद जायौ पूत (धीअलाढ़ो हि (माँ का नाम) उर धरे। हरीअरी गोबर पीयरी सी माँटी हो घोरी मेरी माय, जसोमति आँगन लीपनों । लीपनरी सोहै गज मुतियन चौक रमानी है लौने कलश सों । बहूअरमानी लौने पूत सो |

भाँवर-गीत :-

गौरा गणेश कृपाल मंगल शुभ घड़ी । मीन मेख मृदंग बाजै, गीत मुनियर परहिं भाँवर | सबरी अजुध्या मिथलापुरी में राजै। रामचन्द्र-सीता भाँवर परें॥ मांगल गामें नारि सुमन झरि सोभा साजै ॥ (सातौ भाँवरों के समय गाया जाता है- याकी पहली भाँवर ए तौऊ बेटी बापकी | यह क्रम छठी भाँवर तक चलता है। सातई भाँवर पर याकी सातई भाँवर ऐ अब भई बेटी ससुर की )

वर का द्वार मंगल :-

(देहरी रोपने से पहले बहन यह गीत गाती है) रघनुंदन बनना आज व्याहि लाए जनक लली | सिर सोने कौ मौर विराजै,कानन कुण्डल साजैँ। गल बैजन्ती माला सोहै ॥ बनि आए बर राज व्याहि लाए जनक लली ॥ हाथन कंकन भुज बाजूबन्द मुंदरी रतन दे जड़ी ऊदेखि देखि सुरमुनि मोहे | शोभा बरनी न जाइ व्याहि लाए जनक लली ॥ मुख में पान नेन रतनारे , कजरा की छबि न्यारी, जनकपुरी की सखियाँ देखें देखें नगर की नारी, व्याहि लाए0 कटि पीरौ पीताम्बर सोहे हाथन मेंहदी लाल । पाँव में चंदन खड़ाऊ सोहें घर आए भगवान व्याहि लाए जनक लली ॥ माता कौशल्या करत आरतौ, बहन उतारे राई नोंन | हरे द्रग दरसन के प्यासे पति राखौ भगवान। व्याहि लाए जनक लली॥

वर का द्वार मंगल :-

(देहरी रोपने से पहले बहन यह गीत गाती है) रघनुंदन बनना आज व्याहि लाए जनक लली | सिर सोने कौ मौर विराजै,कानन कुण्डल साजैँ। गल बैजन्ती माला सोहै ॥ बनि आए बर राज व्याहि लाए जनक लली ॥ हाथन कंकन भुज बाजूबन्द मुंदरी रतन दे जड़ी ऊदेखि देखि सुरमुनि मोहे | शोभा बरनी न जाइ व्याहि लाए जनक लली ॥ मुख में पान नेन रतनारे , कजरा की छबि न्यारी, जनकपुरी की सखियाँ देखें देखें नगर की नारी, व्याहि लाए0 कटि पीरौ पीताम्बर सोहे हाथन मेंहदी लाल । पाँव में चंदन खड़ाऊ सोहें घर आए भगवान व्याहि लाए जनक लली ॥ माता कौशल्या करत आरतौ, बहन उतारे राई नोंन | हरे द्रग दरसन के प्यासे पति राखौ भगवान। व्याहि लाए जनक लली॥

बधायो :-

मांइ उठाने के समय का गीत बधायो मेरे आंगना बाजे सुहागौ मेरे आंगना बाजे बीज बधायौ बाजे कि, बेटा जायें बाजे । बधायो मेरे आंगना बाजे बहूए (नाम) तैने बेटा जायौ तो (पति का नाम) मन हुलसे बहूए सीता तैने बेटा जायौ तो श्री रामचन्द्र लाल कौ मन हुलसे । बधायौ मेरे आंगना ।0

शरद-पूर्णिमा ब्रत का अर्ध्य :-

सरद पूनों पुनवंती, अरघ दे धनवंती । इंदुल पूनों भईया की, करवा चौथ जमईया की | अहोई आर्ठे पूता की, दानवीर प्रसूता की अरघ दे री अरघ दै, बारे चंदा अरघ दै ॥ (हाथ में मिष्ठान्न लेकर चंदा को सात बार अर्ध्य दिया जाता है। )

करवा चौथ का अर्घ्य :-

चार घड़ी को चन्द्रमा, चौघड़िया की रात | बारे चंदा अरघ दे, करवा चौथ की रात ॥ (यह अर्घ्य भी सात बार दिया जाता है | )

अहोई अर्घ्य :-

निंहुरी-निहुरी हम फिरेँ अहोई की रात प्रकास । अहोई मईया अब जुहार-फिर जुहार पती-पूत की आस ॥ (चंदा अथवा तारों को सात बार अर्ध्य दिया जाता है। अर्धरात्रि में राधाकुंड स्नान-का माहात्य्य परंपरा से प्रचलित है। )

सकट चौथ का अर्घ्य :-

तिल-तिल दिया, तिल-तिल बाती | तिल-तिल घटे, संकट की राती ॥ बाँधे छूटे, बिछरे मिलें, रोग-दोख सब संकट हरै ॥ ( यह अर्ध्य सात बार दिया जाता है)

हरितालिका तीज के मांगलिक ब्रत का अर्घ्य :-

बेल-बिजौरौ, नारियरो , जहाँ देती गौरन दे अर्घ्य अध्य दिये, वर माँग लिये, महादेव जैसे भरतार । दे मेरी गौरा रानी औडों दे अहिबात। हारी, नीयरौ , दुख-दारिद्री, पर बुद्धियरौ पर चींतीयरी , जुआरियौ-टंटारियौ , गौरा सो मत देउ भरतार । ढुरहर-ढुरहर में बहे, जहाँ बैठी गौरन दे नहाय, माँथे केबड़ौ, रानी सिर गुर्थे, सहागिल जुवाब न दैंय | गौरनदे की पाटियाँ, जिन ऊधौ सो सिंधुरा नहिं मैली होय ॥ हाथ मेंहदुली रंग राचनी, उनके सिर रे कुसूमिल घाट, इडियाँ महावर रंग मंगो , इनके गोद जरूलो पूत। जब रे बुलाइयो सतबाह हुए, रानी सिर गूँथे सुहागिल जुवाव न दैंय । महादेव राक्णे वे नित बढ़े, उनकें धन बहुतेरौ, माल घनेरौ होय ॥ होय लीले हॉसुला, राजा वे चढ़े, सब पंचन में परधान | हॉसिये, चींतीये, कैसे हँसुला तप करिया तप करिया है, लरिया है, माँगरे, सकी डाँग डँगैली है। लकटोरा है, पाती है, शंकर सिरे चढ़ाइयो । माह मास के नहाये माधौ जाइये, जो न जायें फल होइ सो मन इंछिये। जाय जुही को फूल समुद्र को पानी है। महादेव से भरतार गौरन दे रानी है। वे राजा-वे रानी, रात आँगुर पानी । (स्त्रियाँ सौभाग्य संरक्षक इस ब्रत को निर्जल करती है। समापनोपरान्त अरुणोदय से पूर्व यह अर्घ्य दिया जाता है। यह अर्घ्य केवल एक बार दिया जाता है।)

संध्या आरती (सांझी) :-

आरती री आरती,र्सझा मैया आरती। आरती के फूल महेश की बाती | गोरौ री गोरो सांझा गोरो सांझी गोरी , गोरी री गोरौ बनना गोरी, बन्नी गोरी । लेउ री लेउ वानें बोई हैं कचरिया, लेठ री लेठसांझा सांझी की अटरिया॥ लेउरी लेउ वामें पोढ़ेंगी बहुरिया, लेउ री लेउ वाकें सात बिटरियाँ। लेउ री लेउ वाकौ म्हों बटला सौ, लेउ री लेठ वाकी नाक चना सी ॥ लेउ री ले बाकी आँख घना सी | सांझी भैना री का पहरैगी का ओडढ़ेगी सोने कौ ॥ सीसा गुथावैगी, सालु औढ़ैगी, मिसरु पहरैगी सौने को ॥ तेरे बाप ने गढ़ाई , बीरन बेटी मोल चुकाई मेरी सांझी के औरें-घौरे फूल रही फुलवारी, तू तौ पैर लै मेरी सांझी मैया सोलह गज की सारी तेरी प्रीत ने बुलाई-मैं तो संझ्मा पूजन आईं। सोलह कनागत पितरन के-पितरन के माई पिरतन के ॥ उठ भाई-उठ भाई खोल किवार, में आई तेरे पूजन द्वार ॥ पुजें-पुजाएँ का फल होइ, मैया भतीजे सम्पत होई । मैया चइयें नौ दस बीस, भतीजे चइयें मैया पूरे पच्चीस- सांझी मैया अहिवात असीस ॥ सुख समृद्धि को बर वख्शीस ॥

बसन्ती श्रृंगार :- शामा शाम शलोनी मूर्ति कौ श्रृंगार वसन्ती है- श्रृंगार वसन्ती है मोर मुकुट की लटक वसन्ती। चन्द्र कला की चटक वसन्ती, क्‍ मुख भुली की मटक वसन्ती, शामा0 सिर पै पेच श्रवण कुण्डल गलहार वसन्ती, शाम0 माथे चन्दन लगौ वसन्ती पट पीताम्बर कसौ वसन्ती द मेरे मन मौहन वसौ वसन्ती गुंजमाल गलसौ हैं फूलनहार वसन्ती है। शामा0 कनल कडूला हस्थ बसन्ती चले चाल अल मस्त बसन्ती पैहैर रहे सब वस्त वसन्ती सब सखियन में राधे जूं सिरदार वसन्ती है। शामा0 सब ग्वालन को डोल वसन्ती बोल रहे सब बोल वसन्ती बज चंग ढप ढोल वसन्ती रूनल झुंनल पग नूपर की झंनकार वसन्न्ती है। शामा0 परम प्रेम प्रसाद वस वसन्ती लगे चसीलोौ स्वाद वसन्ती है रही मर्याद वसन्ती घासीराम नाम छीतरमल सार वसन्ती है शामा शाम शलौनी मूर्ति को श्रृंगार वसन्ती है। संकट हरेंगी करेंगी भली :- सब संकट हरेंगी करेंगी भली बृसभान की लली ओ होरे बृषभान की लली बरसाने वाली तू मेरी सहाय अरे लागत हैं प्यारी रंगीली गलीओ हो0 राधा श्री राधा श्री राधा रटें | कर राधा रहें कोट व्याधा करें. कीरत तपस्या करी सो भभ,ओहो0 द त्रिभुवन पीत जाने बस में कीए जहां पग धरे शाम नैना धरे... | ये छील याने बहुरूप धरकें झली.. सब संकट हरेंगी करेंगी भली,ओ हो0 रंग में होरी कैसे खेलूँ री :- रंग में होरी कैसे खेलो री या सामरिया के संग... या बाबरिया के (2) कोरे कोरे कलश मंगाये इन में घोरी रंग ओरेयाबाबरिया केसंग भर पिचकारी सनमुख मारी चोली है गई तंग (रंग...) नौ बत बजें निगाडें बज रहे और बज रही चंग कान्हा की तौ मुरली बज रही राधे जू के संग झूँमर पहैरे कठियाँ पैहैरौ पैहैरे बाजूबंद ता सखी बलम तुमारे बडे निखठूठटू तो चली हमारे संग (रंग.....) श्री राधा जी अमीर बरसावें कान्हा मारे रंग. कहें चिरोंजी लाल ये रसिया है रहे रंग बिरंग. रंग में होरी कैसे खेलौ री या सामरिया के संग होरी का रंग बरसे :- ओ हो रंग बरसे भीजें चुंदर वाली (रंग बरसे) अरे सौने की थाली में भोजन परौसे खाय गौरी तेरौ यार बलम तरसें रंग बरसें सौने कौ लौटा गंगा जल पानी पीबे गोरी तेरा यार बलम तरसें (रंग बरसे) लॉग इलायची का बीड़ा लगाया है (2) पाँच और पचासी का बीड़ा चाबै गोरी कौ यार बलम तरसें रंग बरसे बेला चमेली की सेजै बिछायी क्‍ कर सौवे गोरी तेरौ यार बलम तरसे रंग बरसे ओ हो रंग बरसे भीजे ( 2) हाथ ना छोडेंगे :- हाथ ना छोडेगे बस हम जोली खेलेंगे हम होली चाहे भीजे तेरी चुंदरिया चाहे चूंदर चौली साथ ना छोड़ेगे बस हम जोली खेलेंगे हम होली. कान्हा ने मारी भर पीचकारी राधा ने केसर धोली खेलेंगे हम होली लाला के हाथ ओमीर की झोली राधे के हाथ कमोरी खेलेंगे हम होली है ये बिरज की गोरी खेलेंगी होरी यानें दस मन केशर धोली साथ ना छोड़ेगे बस हम जोली खेलेंगे हम होली रसिया बरसाने को :- आज होरी खेलन चलौ बरसाने को आज होरी खेलन महाराज होरी खेलन हिलमिल होरी खेलन चलो बरसाने में (आज होरी0) भैया ढ़प ढ़ोलक मड़ाओ करी त्यारी ले लोऊ हाथ पिचकारी सुरंग बरसाने को (आज0) ओरे बाधो कमर ते नगाड़े मंजिस बजाने को भैया नन्द बाबा कि तुमको दुहाई कोई जाने न पावे लुगाई श्री जमुना नहाने को आज होरी(2). चल के सब घाटे और नाके को घेरी वृषभान लाली को टेरी ये फगुआ मचाने कौ आज होरी(2) रसिया राधारानी :- मूसर ते कान खुजावे री बरसाने वाली राधे बरसाने वाली राधे वृन्दावन वाली राधे (अरे मूसर ते0) अस्सी गज को लहंगा पैहरे या को ओजछे घेर बतावे री बरसाने वाली राधे (अरे मूसर ते) अपने बलम को कहो ना माने यारन को चरण छिवावें री बरसाने वाली राधे मूलाइट कि उड़नी उडे वाये गेटा किरन लगावे री बरसाने वाली राधे कर नायिलोन की चोली पहने दूरई ते चमक दीखाबे री बरसाने वाली राधे(2 ) रसिया बांसुरी :- मेरो ले गई कलेजा चीर श्याम तेरी बाँसुरिया ये बंसी तेरी बडे काम कि और... कर तान सुनावे बडे ध्यान कि सुध खोबे बाबरियाँ शयाम तेरी बाँसुरिया मेरो-ले................ हम जमुना जल भरन जात है मेरे सिर पै गागरिया श्याम तेरी बासुरिया । रिम झिम-2 मेघा बरसे और चम चम-2 बिजली चमके चमके मेरी चुनरियाँ शयाम तेरी बाँसुरिया .. हम दधि बेचन जात बिन्दावन मेरी रोके डगरिया श्याम तेरी बाँसुरिया मेरो ले गई कलेजा चीर बुज को मुख्य रसिया :- जो रस बरस रहौ या बृज में वो रस तीन लोक में नाए द संकरी गली बनी गहवरकी ... दधि ले चली कुवर कीरत की. आगे गाय चलें गिरधर की 'लीन्हें सखा बुलाए। जो रस........ द उनके संग सखी मदमाती इनके संग सखा उत्पाती घेर लयी ग्वालिन रस नारी मन में अत हरसाए जो रस... देजा तान कुमर मोहन को तब छोडू तेरे गोहन को... वन में राज चलै गिरधर कौ लीन्हें सखा बुलाए जो रस...... नैनन में मोय गारी दई :- नैनन में मोय गारी दई पिचकारी दई होरी खेली न जाय गई जल भरन ड्गर मेरी रोकी लईमोयघेरमचायदई होरी..... रा अरे पन घटते धरलों बतराय(2) यों रे लंगूर लंगराई मौते कीनी केसर कोच दकपालन दीनी तेरौ यह ऊधम मेरी सास सिसाय मेरी ननद रिसाय(होरी0) नेंक न लांज करें का हूकी निगाहें बचावै भेया बलदाऊ की अंग लिपट मेरे हाँ हाँ खाय पैयाँ परि जाय (होरी...) औचक कूचन कुमकुमा मारे. रंग सुरंग ऊपर ते डोरे फैंट गुलाल लिये मन मुसकाय-2, (होरी ....) होरी के दिनन मौते दूनौ दूनौ अटक... सालिगराम कौन याय बरजै फागुन मैं रसिया बन जाय रसिया बन जाय (होरी खेली न जाय). नैनन में मौंय गारी दई पिचकारी दई होरी खेली न जाय।। होरी खेलन आयौ श्याम :- हौरी खेलन आयी श्याम, आज याय रंग में बौरी री कौरे कौरे कलश भरे जमुना जल या में कंशर घोरी री मुखते मलौ गुलाल करी कारे ते गोरौ री एक दिना मेरे घर में घुस, या नें माखन चौरौ री. और अपनी गलती देख, आज बन बैठो भौरौ री होरी खेलन....... हरे बाँस की बाँसुरिया, याय तोर मरौरी री हा अरे हाँ हाँ खाय परै जब, पैंया तब याय छोडौ री... होरी खेलन....... सब सखियन नै जुर मिल के, आँगन में घेरी री और याकौ पीतम्बर लेऊ छीन यापै हैराय देऊ चौलौ री. होरी खेलन आयौ शाम आज, याय रंग में बौरौ री... होरी खेलन....... होरी खेल रहे शिवशंकर :- छोरी खेल रहे शिवशंकर गौरा पारवती के संग सेरन तो ये सुलफा पी गये सेरन पी भंग आप पीयें और मौय पिवायें रहे नसे में दंग होरी खेल रहे .... कानन कुंडल हैं बिछुअन के गले में पड़े भुजंग अर्द्ध चन्द्रमा माँधे सोहे जटन मैं सोहे गंग होरी खेल रहे ..... गाँव न धाम बसे पर्बत पै चारो ओर निशंक. और का हू को डर नहीरं लागत याकी आनन्द होरी खेल रहे ..... कोई चद रहे निजी पालकी कोई चढ़ें तुरंग भोले बाबा बूड़ी नाँदिया जो चलै पवन के संग होरी खेल रहे शिशंकर गौरी पार्वती के संग होरी खेलन आयौ रे :- होरी खेलन आइयो रे बरसाने कन्हैया कहूँ भूल भटक मत जाइयो रे बरसाने कन्हैया . आनो कन्हैया बरसाने कन्हैया (होरी खेलन) रंग रंगीली होगी होली संग में होंगे हमस जोली मिल कै नाँच दिखाइयो रे बरसाने- कन्हैया (होरी...) ग्वाल बाल सब संग में लईयौ बलदाऊ को भूल न जईयो ओरे सब मिल के रंग बरसों रे राधा प्यारी बोलन आयी हलुआ पूरी की दावत लाई संग सहेली ललिता आई मिलके माल उड़यौरे बरसाने कन्हैया तौहोरी खूब मचईयों रे बरसाने कन्हैया ढ़ोल नगाडे बजते होगें होली के रसिया गबते होगों. अरे ठुमका चार लगाइयो रे (बरसाने कन्हैया........) होली खेलन अईयो रे बरसाने कन्हैया. गलियन में घेरौ नंदलाला :- गलियन में घेरौ नंदलाला (गलियन में ) अरे नंदलाला मेरी गोपाला राधे जू्‌ ऊंटि पकड़ी बहियाँ (हाँ प्यारी श्यामा हो प्यारी श्यामा) नाँच ऊठि सब बृज बाला (गलियन में) मुंकटाउ छीनों पीताम्बर छीनों याकी छीड़ लई मूतियन माला गलियन में ........... भक्त शिरोमणी सूरदास हैं अरे पी गये वो अमृत प्याला नर हूं नाँचे नारीऊ नाँचे (हो प्योरे ससिया मेरे मन बसिया..) अरे नॉच ऊठो मंडल सारा. (गलियन में) नंदलाला मेरौ गोपाला गलियन में घेरौ. आज होरी खेलन चलो बरसाने को :- आज होरी खेलन चलौ वरसाने को आज होरी खेलन महाराज होरी खेलन हिल मिल होरी खेलन चलो वरसाने को भैया ढप ढोलक मढाओं करौ तैयारी लै लेऊ हाथन पिचकारी सुरंग बरसाने कों आज0 भैया सब मिल जाओ बूढ़े और बारे बांधों कमर ते नगाड़ें मंजीरा बजाने कौ आज0 चल कैं सब नौके ओर घाटन कौ धेशै बृसभान ललीकौ टेरौ ये फगुआ मचाने कौ आज0 बोले वन माली करौ मन चीते नहों बारह महीना फीके होली का दिन आने कौ आज होरी खेलन चलौ वरसाने को होरी आई रे श्याम मेरी सुध लीजो :- होरी आई शाम मेरी सुध लीजो होरी आई रे मैं हूं सांस ननद के बस मे हां प्यारे मेरे मन बसिया मेरी गलियन के चक्कर दीजो होरी आई रे खेलन के मिस अइयो मेरे अंगना मेरे जीवन कौ कछ रस लीजो होरी आई रे0 परषोत्तम प्रभु की छवी निरखत हां रे हो प्यारे रसिया मोय हीयराते लिपटाय लीजौ होरी आई रे0 सुध लीजौ मेरी सुन लीजी होरी आई रे0 बुज की लाज रसिया :- बृज की तौय लाज मुकुट वारे। बृज की तौय .... मुकट बारे रे मुकट बारे बृज की तौय ...... चन्दा सूरज तेरौ ध्यान धरत हैं। (हाँ) रसिया.. ध्यान धरत नौ लख तारे। बृज की तौय .... इन्द्र नै कोप कीयौ जब बृज पै तब नख पै गिरवर धारे बृज की तौय लाज मुकुट बारे... तेरे बिरज में लाला मोर बहत है. गाय गोप के स्खवारे। बृज की तौय ...... नेंक आगें आ श्याम तोपै रंग डारूँ :- नैंकि आगें आ श्याम तोपे रंग डारूं। नैकि आगें आ... द ओरे रंग डारू रे गुलाल डारू मैंकि आगें आ श्याम0 तेरे गालन पै गुलचा मारूं चौबा चंदन अतर अरगजा अमीर गुलाल मल्यौ तेरे मुंख पे तोय कारे ते गोरौ कर डारू नैक आगें आ. चन्द्र सखी भज बाल कृष्ण छवि हो बारी राधे ओ प्यारी राधे. तन मन धन तौपे बारूं नैंकि आगे आ .... मेरी चुंदर में लग गयौ दाग री :- मेरी चुंदर में लग गयौ दाग री । याने ऐसौ चटक रंग डारौ ऐसौ चटक रंग ऐसौ गजब रंग मौहू ते केतिक बृज सुन्दर ऐती उनते न खेलै फागरी औरन कौ अचरा न चूंमत है। याकी मोही ते लग रही लाग री यानें ऐसी चटक रंग डारौ बल बल दास बास बृज छोडू जेंसी होरी मैं लग जायें आग री भेरी चंदर में लग गयी दाग री चानें ऐसौ चटक रंग डारौ बधाई नाँचन हारी :- जुग जुग जीयो मेरी नाँचन हारी... नाँचन हारी नचा मन होरे है नाँचन हारी कै दो दौ हुजो बमुखदम और पटवारी. जोर सिया तैरी फल असीसा.... तो दऊगी पात तुम्हारी, पूरी ऊपर बूरौ दऊगी आलू की तरकारी जुग जुग जीयौ मेरी नाँचन हारी.. गोपी बने भोले नाथ :- गोपी बने भोलेनाथ बिरज में गोपी बने महाराज देखन कौ गौरा हम भी चलेंगे तेरे साथ (बिरज में....) घूम घूमारौ लंहगा पहैरो ओडी चुन्दरिया लाल (बिरज में...) नख सिख सौ भोले गहनों पहरो अरे पहरो गले में हार (बिरज में...) आगे आगे गौरा पीछे पीछे भोला शोभा वर्ण न जाय बिरज में गोपी में बने हँस कर के बोली यों सखियाँ को है तुम्हारे साथ (बिरज में....) तब गौरा हँस के यों बोली जीवन साथी साथ (बिरज..) कुंजन में बैठे मन मौहन जान गये सब हाल (बिरज... ) हँसकर के बोले मन मोहन आओ गौरी नाथ (बिरज...) ऐसी बंसी बजाई मनमोहन नाँच उठे भोले नाथ (बिखज में ....) गोपी बनें (2) रसिया गिराज जी :- अरे लीयौ नखपै गिरीवर धार... कन्हैया मेरौ बारौ (2) जब कोप इन्ध ने कीनों, सब घेर बिरज कौ लीनों जल बरसायो मूसर धार कन्हैया मेरौ प्यारों (ओरे लीनों....) यों कहैँ जसोदा मैया सब देऊ सहारौ भैया या गिरवर को भारी भार ऐ ग्वाल पूँछरी बारों सोटा कौ दियौ सहारो सब बृज बासी कर दिये पार कन्हैया मेरो बारौ (अरे लीनो....) जो बृजवासी कथ कै गावें, बो बास बिरज कौ पावें लूँटे गामे मोज बहार, कन्हैया मेरो बारौ लीयों नख पै गिरवर धर महारास लीला :- शिव ने महारास देखन कौ अद्भुत रूप धरौ नारी (2) कै शिव ने जटा लई है सूत पार लईं पटिया बैंनी गूंथ भेष अपनों बदलौ अबधूत धरे मुद्रिका ऊतार कै, जो लीये झूमका पैहैर सुन्दर गाल कपोल पै, नट नागर की लैहैर चौली दामन पैहर शीश पै ओड़ लई साड़ी पैहर कर में चूड़ी नग दार कडूला गजरे दूआँ दार देत छल्लाे हथ फूल बहार. कडे छडे लछ्छे पडे, जो पाय जेब अनमोल. सात गाठरी नेहुआ, और बिछुअन रमझोल साँकर छल्लीे पैहर करी वृन्दावन की तैयारी (शिव....) बन गये सौलह बरस की नार चलै गज गज ठुमका की चाल... दंख कर घासी भये तो निहाल जो वृन्दावन के रास में पहुँचे जाय महेश और मिले सखिन के झुण्ड में जो धर गोपी कौ भेष तब जान गये श्री कृष्ण कहि गोपेश्वर त्रिपुरारी शिव ने महारास देखन कौ अदिभुत रूप धरौ नारी।। फागुन आयो रे :- डरवाय लै गोरी रंग कि फागुन आयौ रे... आयौ रे आयौ रे फागुन आयौ रे” . हॉँ फागुन ते फागुन हैं आयौ रसिया सज णज कै जब आयौ अब नॉचू तेरे संग कि फागुन आयौ रे.... दुनियाँ चार दिन कौ मेला बृज में दाऊजी अलबेला भर भर पीयें भाँग कौ बेला और मौय पियावै संग कि फागुन आयौ रे... तबला बाजें सिरंगी बाजें ढोलक झाँज मजीरा बाजै और बाजें मिरदंग.कि फागुन आयौ रे होरी लीला :- घूँघट के पर्दी पै कान्हा भर पिचकारी मारेंगौं (2) पहैली पिचकारी मेरी अखियन पै मारी मेरे कंजरा की कोर वबिगारेंगौ (घूँघट 0) दूजी पिचकारी मेरी माँथे पै मारी मेरी बिंदिया कौ चमक बिगारेगी (घूँघट 0) तीजी पिचकारी मेरी गरदन पै मारी मेरी हँसली की आव बिगारेगौ (घूँघट 0) चौथी पिचकारी मेरी छतीयन पै मारी मैरी चौली की चमक बिगारेगौ( घूँघट 0) पाँची पिचकारी मेरी कमर पै मारी मेरी कमर की लचक बिगारेगौ(घूँघट 0)... छटी पिचकारी मेरी घुंटअन पै मारी... अरर मेरे लहंगा की कोर बिगारेगौ( घूँघट 0) साती पिचकारी मेरे टकनन पै मारी... मेरी नई पाय जेब बिगारेगौ (घूँघट 0) एक फूहरिया नारी :- घकब तक सहूँ में रहूँ मन को मार एक फूहर है नार कब तक ऊठती सबेरे बजा कर के आठ ऊठते ही ठानें लड़ाई के ढाढ है लेकर के झाड़ पड़े हैं। पिछार न्हाती न धौती देय राटी चढाय आटे में बालों को लेती मिलाय याके मुंह से टपाटक टपकी है लार सहायू और ननद न नैंकू डरें घासी मरद चाहें रडूआ मरें जो घर के बलम कौ समझती गमार बन आयो रसिया होरी कौ :- बन आयी रसिया होरी कौ(2) होरी कौ राधा गौरी कौ(बन0) मल्य काछ श्रृंगार धरौ हैं (बरे हाँ रे0) याकौ फैंटा सीस मरारी कौ (बन आयौ रे0) माँथे याके मोर मुकुट है हाँ प्यारे रसिया मेरे मन बसिया कानन में याके कुण्ङल सौ है... याके गल बैजन्ती माल (रसिया) याके पाव पन्सतरी हाथ कडूला ये रसिया राध कौ दूलहा ये तौ चले ठुमक को चाल (रसिया0) ये रसिया राध कौ दूलहा ये तौ चलै ठुमक की चाल (रसिया0) चन्द्र सखी भज बाल कृष्ण छीव ये रसिया हैं राधा गोरी कौ बन आयौ रे (2) रसिया होरी :- आज कैसौ बनौ बृज राज रसिया होरी कौ माँथे याके मौर मुकुट है कानन में याके कुण्ड़न सौ हैं गलमुतियन को माल रसिया होरी कौ मल मल कौ योनें जामाँ पहियौ चूड़ीदार पाजामा पहियौ याके कमर कोध्नी त्यार अखियन याके कजरा सो है मुख के भीतर बीड़ा मौ है ये तौ तनक मुसकाय (रसिया हौरी आज) पाव पंसरी हाथ कडूला ये रसिया राधे को दूल्हा ये तौ चलें ठुमक की चाल रसिया हौरी कौ राधा गोरी कौ आज कैसौ बनौ बज राज रसिया हौरी कौ हौरी का रंग :- घहौरी का रंग उड़न लागौ कर कैसे बदरा हैं रहे लाल हो लाल हौ हौरी बरस दिना में आवत है कोई माल मिठाई खावत है कोई गावें दें दें ताल है ताल कोई नाँच रहो कोई गाय रहौ कोई ठडौई ठडौ मुस्काय रहौ काहू पै पोली बाग है पाग (होरी...) होरी गोरी नाँचत है और ताल मृदंग बजावत है ये लाल चिरोंजी गाय रहे हौरी की तान सुना रहै सब सुनौ संग के यार हैं यार कैसे बदरा हैं रहे लाल हो लाल गौरी भरकै झौली उडावें गुलाल हौरी कौ रंग उड़न लागौ कैसे बदरा हैं रहे लाल ब्रज मण्ङल देश दिखाय रसिया :- बृज मण्ङल देख दिखाय रसिया (बुजमण्ड्ल 0) तेरे बिरज में मोर बहुत हैं कूंकत मोर फिरें छतिया तेरे बिरज में लाला गाय बहुत हैं। पी पी दूध परें परिया तेरे बिरज लाल नार बहुत. अरे इनें देख मेरौ मन बसिया बृज मण्ङल देख दिखाय रसिया होरी :- न॑नुदुल कैसे खेली जाय अनौखी हौरी शाम की या होरी में खोय गई मेरे पायल पाँऊ की अब ही नई बनवाई मैंने बहुत ही दाम की (नंनुदुल0) रीत बूरी हैं अरी बहिन या गोकुल गाँव की कि रेग डारें और छाप लगावें अपने नाम की नंनुदुल कैसे खेली जाय अनौखी हौरी शाम की श्री दाऊजी महाराज रसिया :- बअलबेलों छैल छबिलो ब्रज कौ राजा दाऊ दयाल भोर हौत जाकी नौवत बाजै जागे दीन दयाल और उठें रवती रमण मुदित मुन झाँकी बडत्री रे बिषाल कौरे कौरे कलश भरे जमुना न्हायवे कौ ततकाल इत्र फुफेल सौ मालिश है रही मल मल नहाय दयाल अस्सी गज की धौती पैरै यालौ जामा बडौ रे विशाल और पटकाते याकी कमर कसी है माँथे बैदा लाल नित प्रति भाँग का भोग लागत है और चकाचक माल साधू बिदामन भोजन करते थौडी पै हीरा लाल बड़े बड़े छत्त लगे है याके ऊपर ध्वजा लटक रहौ लाल और मन्दिर पीछे कुण्ड़ बनौ है काट्टें जब के जाल चतुर्वेदी तान :- कछु खड़ बड़ हौय अटा में मूँसे मचाय रहे शोर लाय दें मुसैरा मोल बलम मौकौ लाय दैं मुसैंरा मोल मैंने तो जानी कौऊ चौर घुसि आयो निकलौ बलम बड़े भोर अटा में मुंग खाय मेरौ भात बिखेरौ सब खाय गये पकौड़ी न कौ झौर अटला फौरो मेरौ बटला फौरी सब दीनी भङैरी कौ फौर कछु खड़ बड़ खड़ बड़ होय अट में मूँसे मचाय रहे शोर बचतुर्वदी तान :- भैया हैरान तेरे नखरे न मारें आँखे तेरी नीबू कीसी फार्के आयौ गऊआ पै तिकल निशान (तैरे0) होटों की लाली और मिस्सी है काली चोपन के मारें ये ऐसे निशान (तेरे0) छाती पै गोला तोप से भारी गोदी में लैलऊँ लगें मौकौ प्यारी नजरियन सौ मारें ये ऐसे निशान (तेरे.) तेरी जाँघन की त्यारी पै जाऊँ बलिहारी लगें पीड़री हमको प्यारी चाल चलें जैसे तूफान तेरे नखरेन के मरें तकिया लगावें और तरबा सिरावें क्यौ प्यारी तू नाँच सर मावें भये चौब लला तौपै कुरबान तेरे नखरेन के मारें बैज तेरी टूड़ी के नीचे किले कौ मैदान (तेरे.) रसिया बाजुबंद :- मेरी खोय गयौ बाजू बंद कि रसिया हौरी में. बाजूबंद मेरौ बडौरे मौल कौ तैते णराय लऊँ पूरे तौल कौ सुन नन्द के छलछन्द रसिया हौरी में अब घर जाऊँ तो मेरी सास लडैगी नन्द बलम के कान भरैगी बलम सिर पै मार परैगी मेरौ है जाय(2) सब रस भंग कि रसिया हौरी में मेरी तुम्हारी लाल प्रति पुरनी तुमने मौहन नाँच पहिचानी मौय लै चल अपने संग कि रसिया होरी में बृज में लाला ऊधम मचायौ होरी कौ हुर दंग मचायौ लाज सरम जानें कहाँ धीर आयौ में तो है गई तोते तंग कि रसिया होरी में चल गोरी तोय भाँग छनाँय दऊँ मोरी गोपी तौय बनाय दऊँ फिर बाजें ढोलक मृदंग कि रसिया होरी में मेरौ खोय गयौ बाजू बंद (2) होरी बरसाने की :- फाग खेलन बरसाने आये हैं ये नटवर नन्द किशोर ( 2 ) नन्द गाम के लाला आये संग गोपी ग्वाला लाये... ऐ जी रंग केशरिया भरके लाये हैं (ये नटवर नन्द किशोर) घेर लई सब गली रंगीली छाय रही छवि छटा छबीली ये अमीर गुलाल उड़ाये है मारत भर भर झोल भलां ढप ढोल मृदंग बजाये है बंशी को घन घोर ऊमड़ घटा अम्बर पै छाई कारी पीरी हरी सुहाई राधे ने सैन चलाये है ये तो पकड़े माखन चोर सखीयन नें पकड़े गिरधारी नर ते शाम बनाये दिये नारी याय चून्दर शीश ऊड़ाये है दै काजर की कोर (फाग..) लै रहे चोट ग्वाल ढालन पै केशर कीच मलै गालन पै या र्ने हरीयल बॉँस मंगाये है जो कोई चलन लगे (फाग....) जो लाला तुम जानों चाहौ फगुआ लाऔ सब सखियन कू घर पहुचाओं राधे जू के हा हा खाओ घासी राम जस गाये हैं। भयो कविता को छोर (फाग....) चलो अईयो रे श्याम मेरे पलकन पे :- चलौ आईयो रे शाम मेरे पलकन पै (चलौ0). . पलकन पै मेरी अलकन पै तू रीझौ मेरे नवल चोबना (हो0 मेरे0) में रीझी मेरे तिलकन पै तू रीझी मेरी चटक चाल पै में रीझी तेरी अलकन पै. चन्द्र सखी भजबाल कष्ण छीव अमीर गुलाल की झलकन पै चलौ अईयो रे शाम मेरे पलकन पै कवित्त दीपावली :- आई जो दीपावली बृज पकवान वने सूंगत सुगंध बड़ौ मन ललचायौ हैं। बाबा इन्हें कौन खाय कौन को लगेगौ भोग अरे कौन वो इन्द्र हैं कहौ सो चलो आयो हैं। बाबा की पकर बाँह गोप गईया संग लीनी अरे इन्द्र छुड़वाय यायने गिर्राज पुजवायौ हैं। कवित्त :- वृन्दावन धाम कौ बास भलौ जहाँ पास बहै यमुना पटरनी जो जन न्हाय कै ध्यान धरै बैकूंठ मिलै तिनकौं रजिधानी बेद पुरान बरवान करै सब सन्त मुनी जिन के मन मानी जमुना जमदूतन काटत भब तारत हैं श्री रधिका रानी रबैया :- लाल ही लाल के लाल ही लोचन लाल ही के मुख लाल ही बीड़ा लाल ही लाला कौ भेस बनों और लाल खड़ौ जमुनाजी के तीरा लाला ही लाल कौ जामा बनौ और लाल के कन्ठ बसैऊर हीरा. सब लाल ही लाल को भेस बनौ और लाल के हाथन लाल मंजीरा होली वृन्दावन धामकी :- के वृन्दावन आ